FG.12.4.1. A Roadside Stand: Explanation in Hindi Class 12 English CBSE

About the Author 

Robert Frost (1874–1963) was a towering figure in twentieth-century American literature. Born in San Francisco, California, he moved to New England at age eleven, a location that became the heart of his poetic landscape. Frost attended both Dartmouth College and Harvard University, though he never earned a formal degree, preferring to educate himself through literature and nature.
Throughout his life, Frost held various jobs, including working as a teacher, cobbler, editor, and farmer. These experiences grounded his poetry in the realities of rural life. His achievements are unparalleled; he remains the only poet to win four Pulitzer Prizes for Poetry and was awarded the Congressional Gold Medal. Famous for masterpieces like Mending Wall and Birches, Frost used simple language to explore complex human tragedies and fears. His work, characterized by its "pitiless clarity" and deep humanity, remains a cornerstone of American letters. 

He is a highly acclaimed American poet of the twentieth century. Robert Frost wrote about characters, people and landscapes. His poems are concerned with human tragedies and fears, his reaction to the complexities of life and his ultimate acceptance of his burdens. Stopping by the Woods on a Snowy Evening, Birches, Mending walls are a few of his well-known poems. In the poem A Roadside Stand, Frost presents the lives of poor deprived people with pitiless clarity and with the deepest sympathy and humanity. 

Explanation in Hindi

BEFORE YOU READ / पढ़ने से पहले

  • Have you ever stopped at a roadside stand? What have you observed there?
    क्या आप कभी सड़क किनारे किसी स्टॉल पर रुके हैं? आपने वहाँ क्या देखा है?

The little old house was out with a little new shed
In front at the edge of the road where the traffic sped,
A roadside stand that too pathetically pled,
It would not be fair to say for a dole of bread,
But for some of the money, the cash, whose flow supports
The flower of cities from sinking and withering faint.
वह छोटा सा पुराना घर जिसके आगे एक नया छप्पर निकला हुआ था, ठीक सड़क के किनारे जहाँ गाड़ियाँ तेज़ रफ़्तार से गुज़रती थीं। वहाँ सड़क किनारे लगी वह दुकान बड़ी दयनीयता से याचना कर रही थी। यह कहना गलत होगा कि वह रोटी के एक टुकड़े (भीख) के लिए विनती कर रही थी, बल्कि वह तो उस नकदी (Cash) की आस में थी, जिसका बहाव शहरों की रौनक़ और विलासिता को मुरझाने से बचाता है।
 

व्याख्या: यहाँ कवि ग्रामीण लोगों की उस छोटी सी आशा का वर्णन कर रहे हैं जो शहर के लोगों से 'भीख' नहीं बल्कि 'व्यापार' चाहते हैं। वे चाहते हैं कि शहर का पैसा उनके हाथों तक भी पहुँचे। जिस तरह शहर की अर्थव्यवस्था अमीर लोगों के खर्चों से टिकी रहती है, ग्रामीण भी उसी पैसे का एक छोटा हिस्सा अपने उत्पादों के बदले चाहते हैं। 
उदाहरण: अक्सर हाईवे पर हम देखते हैं कि एक किसान ताज़े तरबूज़ या भुट्टे लेकर बैठा होता है। वह आपसे दान नहीं माँग रहा, बल्कि वह चाहता है कि आप अपनी महँगी गाड़ी रोकें और उससे कुछ खरीदें ताकि उसे वह 'नकदी' मिल सके जिससे वह अपना घर चला सके।
 

The polished traffic passed with a mind ahead,
Or if ever aside a moment, then out of sorts
At having the landscape marred with the artless paint
Of signs that with N turned wrong and S turned wrong
Offered for sale wild berries in wooden quarts,
Or crook-necked golden squash with silver warts,
Or beauty rest in a beautiful mountain scene,
You have the money, but if you want to be mean,
Why keep your money (this crossly) and go along.
वह चमकता हुआ शहरी यातायात (गाड़ियाँ) अपनी मंज़िल की धुन में आगे निकल जाता था, और अगर कभी कोई पल भर के लिए रुकता भी, तो उसका मिज़ाज बिगड़ जाता था—यह देखकर कि अनाड़ी हाथों से पुते पेंट ने उस प्राकृतिक नज़ारे को खराब कर दिया है, जहाँ दिशा-सूचक 'N' और 'S' भी उल्टे लिखे थे। वहाँ जंगली बेरियाँ और सुनहरी कद्दू बेचे जा रहे थे। यदि आपके पास पैसा है और आप फिर भी इतने रूखे (कंजूस) हैं, तो अपना पैसा अपनी जेब में रखिए और चलते बनिए। 

व्याख्या: शहर के अमीर लोग केवल सुंदरता के प्रेमी हैं, मानवता के नहीं। उन्हें सड़क किनारे की दुकान 'गंदी' और 'बदसूरत' लगती है क्योंकि वह उनकी हाई-फाई दुनिया से मेल नहीं खाती। वे दुकानदार की मेहनत देखने के बजाय उसकी टूटी-फूटी पेंटिंग और गलत लिखे शब्दों का मज़ाक उड़ाते हैं। 
उदाहरण: एक रईस व्यक्ति किसी गाँव की दुकान पर रुकता है और सामान खरीदने के बजाय यह शिकायत करता है कि "यहाँ कितनी धूल है" या "बोर्ड पर स्पेलिंग गलत लिखी है।" वह यह नहीं समझता कि वह 'गलत लिखा बोर्ड' उस गरीब की मेहनत का प्रतीक है।
 

The hurt to the scenery wouldn’t be my complaint
So much as the trusting sorrow of what is unsaid:
Here far from the city we make our roadside stand
And ask for some city money to feel in hand
To try if it will not make our being expand,
And give us the life of the moving-pictures’ promise
That the party in power is said to be keeping from us.
प्राकृतिक दृश्य की खूबसूरती का बिगड़ना मेरी मुख्य शिकायत नहीं है, बल्कि मेरी शिकायत उस अनकहे 'भरोसेमंद दुख' की है: यहाँ शहर से दूर हम अपनी दुकान लगाते हैं और कुछ शहरी पैसा अपने हाथों में महसूस करना चाहते हैं, यह देखने के लिए कि क्या यह हमारे जीवन स्तर को ऊँचा नहीं उठाएगा, और हमें वह जीवन नहीं देगा जिसका वादा फिल्मों में किया जाता है, जिसे सत्ताधारी सरकार हमसे दूर रख रही है।
 

व्याख्या: कवि कहते हैं कि असली दर्द 'दृश्य खराब होने' का नहीं, बल्कि उन गरीबों की अधूरी उम्मीदों का है। वे ग्रामीण भी वही सुख-सुविधाएँ चाहते हैं जो वे फिल्मों में देखते हैं (बिजली, पक्के घर, अच्छा खाना)। उन्हें लगता है कि सरकार ने जानबूझकर उन्हें विकास से वंचित रखा है।
उदाहरण: एक ग्रामीण बच्चा टीवी पर एक आलीशान जीवन देखता है और उम्मीद करता है कि उसके पिता की सड़क किनारे की छोटी सी दुकान उसे वह सब दिला पाएगी। वह 'शहरी पैसे' को एक चाबी की तरह देखता है जो उसके लिए खुशियों के दरवाज़े खोल देगा।
 

It is in the news that all these pitiful kin
Are to be bought out and mercifully gathered in
To live in villages, next to the theatre and the store,
Where they won’t have to think for themselves anymore,
While greedy good-doers, beneficent beasts of prey,
Swarm over their lives enforcing benefits
That are calculated to soothe them out of their wits,
And by teaching them how to sleep they sleep all day,
Destroy their sleeping at night the ancient way.
खबरों में यह है कि इन दयनीय सगे-संबंधियों की ज़मीनों को खरीद लिया जाएगा और उन्हें दया का नाटक करते हुए गाँवों में थिएटर और दुकानों के पास बसाया जाएगा, जहाँ उन्हें अब अपने बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं होगी। जबकि ये 'लालची परोपकारी' और 'दयालु शिकारी दरिंदे' उनके जीवन पर मंडराएंगे और उन पर ऐसे फायदे थोपेंगे जो उनकी बुद्धि को सुन्न कर देंगे। उन्हें दिन में सोना सिखाकर, ये लोग उनकी रातों की सुकून भरी नींद छीन लेंगे 

व्याख्या: यहाँ राजनेताओं और व्यापारियों पर कटाक्ष है। विकास के नाम पर गरीबों को उनकी जड़ों (खेती) से हटा दिया जाता है और उन्हें 'मुफ़्त' की सुविधाओं का लालच देकर आलसी और निर्भर बना दिया जाता है। उनकी मेहनत करने की आदत और आत्मसम्मान छीन लिया जाता है।
उदाहरण: किसी सरकार द्वारा गाँव की उपजाऊ ज़मीन लेकर वहाँ मॉल बना देना और किसानों को शहर के एक छोटे कोने में फ्लैट दे देना। किसान अब अपनी खेती नहीं कर सकता और वह सरकार की 'खैरात' पर निर्भर हो जाता है, जिससे उसका मानसिक सुकून खत्म हो जाता है।
 

Sometimes I feel myself I can hardly bear
The thought of so much childish longing in vain,
The sadness that lurks near the open window there,
That waits all day in almost open prayer
For the squeal of brakes, the sound of a stopping car,
Of all the thousand selfish cars that pass,
Just one to inquire what a farmer’s prices are.
कभी-कभी मुझे खुद लगता है कि मैं इस व्यर्थ की 'बचकाना लालसा' (उम्मीद) के दुख को सहन नहीं कर सकता। वह उदासी जो उस खुली खिड़की के पास मंडराती रहती है, जो सारा दिन किसी कार के रुकने की आवाज़ और ब्रेक की चीख के इंतज़ार में एक मूक प्रार्थना की तरह बैठी रहती है। हज़ारों स्वार्थी कारों में से कोई एक तो रुके और किसान से उसकी चीज़ों के दाम पूछे। 

व्याख्या: किसान की उम्मीद को 'बचकाना' कहा गया है क्योंकि वह मासूमियत से सोचता है कि कोई न कोई तो उसकी मदद के लिए रुकेगा। वह खिड़की से बाहर टकटकी लगाए देखता है, पर उसकी यह उम्मीद टूट जाती है क्योंकि शहर के लोग अपने ही काम में व्यस्त हैं। 
उदाहरण: एक कुम्हार धूप में बैठ कर हर गुज़रती गाड़ी को उम्मीद से देखता है कि शायद कोई रुककर घड़ा खरीदेगा। वह हर बार ब्रेक की आवाज़ सुनकर खुश होता है, पर अक्सर वह आवाज़ किसी और वजह से होती है, उसकी दुकान के लिए नहीं।
 

And one did stop, but only to plow up grass
In using the yard to back and turn around;
And another to ask the way to where it was bound;
And another to ask could they sell it a gallon of gas
They couldn’t (this crossly); they had none, didn’t it see?
एक कार रुकी तो सही, पर सिर्फ घास खराब करने के लिए ताकि वहाँ से गाड़ी को मोड़ा जा सके; दूसरी रुकी तो सिर्फ रास्ता पूछने के लिए कि सड़क कहाँ जाती है; और एक और रुकी यह पूछने के लिए कि क्या वे पेट्रोल (गैस) बेचते हैं? वे नहीं बेचते थे (गुस्से में जवाब दिया); उनके पास पेट्रोल नहीं था, क्या उसे यह दिखाई नहीं देता था?
 

व्याख्या: शहर के लोग गाड़ी रोकते तो हैं, पर ग्रामीण की मदद के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए। वे उस गरीब की भावनाओं की परवाह नहीं करते। वे उससे ऐसी चीज़ें माँगते हैं (जैसे पेट्रोल) जो एक छोटी दुकान पर मिलना मुमकिन ही नहीं है, जो उनकी मूर्खता और बेरुखी को दर्शाता है। 
उदाहरण: एक व्यक्ति महँगी कार रोकता है और एक छोटे से फल बेचने वाले से पूछता है, "यहाँ आसपास कोई बड़ा शोरूम है क्या?" या वह बिना कुछ खरीदे उसकी दुकान के सामने गाड़ी मोड़कर धूल उड़ाता हुआ निकल जाता है।
 

No, in country money, the country scale of gain,
The requisite lift of spirit has never been found,
Or so the voice of the country seems to complain,
I can’t help owning the great relief it would be
To put these people at one stroke out of their pain.
And then next day as I come back into the sane,
I wonder how I should like you to come to me
And offer to put me gently out of my pain.
नहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कमाई के इस छोटे पैमाने पर वह आत्मिक और आर्थिक उन्नति कभी नहीं मिल पाई जिसकी ज़रूरत थी। ऐसा लगता है जैसे पूरा ग्रामीण इलाका यही शिकायत कर रहा है। मुझे लगता है कि कितना बड़ा सुकून होगा यदि इन लोगों को एक ही झटके में उनके दुखों से मुक्ति दिला दी जाए (अर्थात मृत्यु)। पर अगले दिन जब मैं होश में आता हूँ, तो मैं सोचता हूँ कि मुझे कैसा लगेगा यदि कोई मेरे पास आए और कहे कि वह मुझे मेरे दुखों से मुक्ति दिला देगा? 

व्याख्या: अंत में कवि बहुत भावुक हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि ग्रामीणों की गरीबी इतनी गहरी है कि शायद 'मौत' ही एकमात्र रास्ता है। लेकिन जब वह शांत होते हैं, तो उन्हें अहसास होता है कि यह समाधान गलत है। असली ज़रूरत सहानुभूति और आर्थिक समानता की है। 
उदाहरण: कभी-कभी हम किसी अत्यंत गरीब व्यक्ति की हालत देखकर दुखी होकर कहते हैं, "इससे अच्छा तो यह मर ही जाए," पर यह एक क्षणिक आवेश है। जब हम ठंडे दिमाग से सोचते हैं, तो हमें लगता है कि हमें उनकी मदद करनी चाहिए, न कि उनके खत्म होने की कामना। 

Theme (विषय/प्रसंग)इस कविता का मुख्य विषय शहरी और ग्रामीण जीवन के बीच की गहरी आर्थिक असमानता और अमीर वर्ग की गरीब वर्ग के प्रति संवेदनहीनता है।

Main Idea (मुख्य विचार/धारणा): कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि ग्रामीण लोग भी सम्मानजनक जीवन और आर्थिक प्रगति के हकदार हैं। वे केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि शहर के लोगों से समर्थन और व्यापार चाहते हैं ताकि वे अपनी गरीबी के चक्र से बाहर निकल सकें।

Poetic Device Used

Reference 

Explanation 

Personification




Metaphor



Oxymoron





Transferred Epithet



Alliteration



Anaphora



Repetition

"A roadside stand that too pathetically pled"



"The flower of cities"



"Greedy good-doers" / "Beneficent beasts of prey"




"Polished traffic" / "Selfish cars"



"Pathetically pled"



"And another to ask... And another to ask"


"N turned wrong and S turned wrong"

निर्जीव दुकान को 'प्रार्थना' (Plead) करते हुए दिखाया गया है, जैसे वह जीवित हो।


यहाँ 'शहर के फूल' उन अमीर और सफल लोगों के लिए प्रयुक्त हुआ है जो शहर की शोभा बढ़ाते हैं।


परस्पर विरोधी शब्दों का मेल। ऐसे लोग जो मदद का दिखावा करते हैं पर असल में लालची और शिकारी हैं।


यहाँ ट्रैफिक या कारें स्वार्थी नहीं हैं, बल्कि उनमें बैठे लोग स्वार्थी हैं। भावना को कार पर 'ट्रांसफर' कर दिया गया है।


'P' व्यंजन की पुनरावृत्ति जो लय पैदा करती है।


एक ही वाक्यांश से लगातार पंक्तियों की शुरुआत करना।


'Wrong' शब्द को दोहराकर ग्रामीण सादगी और शहर की आलोचनात्मक दृष्टि पर ज़ोर दिया गया है।


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