About the Author
Pablo Neruda (1904–1973) was the celebrated pen name of Neftali Ricardo Reyes Basoalto. He was born in the town of Parral, Chile, and eventually became one of the most influential poets of the 20th century. Neruda’s education and early life in Chile deeply rooted his work in the landscapes and struggles of his homeland.
His professional life was multifaceted, involving careers as a diplomat, politician, and prolific writer. Neruda’s poetry is renowned for its use of accessible yet beautiful imagery, making profound emotions and social critiques understandable to the masses. Throughout his career, he authored numerous collections that explored themes ranging from surrealist despair to historical epics and simple odes. His greatest literary achievement came in 1971, when he was awarded the Nobel Prize for Literature. His work, including the poem "Keeping Quiet," remains a testament to his commitment to human solidarity and the power of silent introspection.
Neruda’s poems are full of easily understood images which make them no less beautiful. He won the Nobel Prize for Literature in the year 1971. In this poem Neruda talks about the necessity of quiet introspection and creating a feeling of mutual understanding among human beings.
Explanation in Hindi
BEFORE YOU READ / पढ़ने से पहले
- What does the title of the poem suggest to you? What do you think the poem is about?
कविता का शीर्षक आपको क्या संकेत देता है? आपको क्या लगता है कि यह कविता किस बारे में है?
Now we will count to twelve
and we will all keep still.
For once on the face of the Earth
let’s not speak in any language,
let’s stop for one second,
and not move our arms so much.
अब हम बारह तक गिनेंगे
और हम सब स्थिर हो जाएंगे।
पृथ्वी की सतह पर एक बार के लिए ही सही
आइए हम किसी भी भाषा में बात न करें,
आइए एक सेकंड के लिए रुक जाएं,
और अपने हाथों को इतना न हिलाएं।
व्याख्या: कवि 'बारह' तक गिनने का आह्वान करता है, जो घड़ी के घंटों या राशि चक्र के संकेतों का प्रतीक हो सकता है। वह चाहता है कि हम अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से एक पल का विराम लें। जब हम मौन होते हैं और शारीरिक हलचल (जैसे काम करना या बहस करना) बंद कर देते हैं, तो हमें आत्म-चिंतन का अवसर मिलता है। 'भाषा' का उपयोग न करने से मेरा मतलब यह है कि भाषा अक्सर लोगों के बीच मतभेद पैदा करती है, मौन हमें एकजुट करता है।
उदाहरण: जैसे किसी बड़े विवाद के बीच यदि दोनों पक्ष एक मिनट के लिए चुप हो जाएं और बिना कुछ बोले बस शांति से बैठें, तो अक्सर उन्हें अपनी गलती का अहसास हो जाता है और गुस्सा शांत हो जाता है।
It would be an exotic moment
without rush, without engines,
we would all be together
in a sudden strangeness.
यह एक अनोखा (विदेशी) क्षण होगा
बिना किसी हड़बड़ी के, बिना इंजनों के,
हम सब साथ होंगे
एक अचानक पैदा हुई विचित्रता में।
व्याख्या: मौन का वह क्षण बहुत अनूठा होगा क्योंकि हमारी दुनिया मशीनों के शोर और काम की आपाधापी से भरी है। जब अचानक सब कुछ रुक जाएगा, तो हमें एक अजीब लेकिन सुखद एकता का अनुभव होगा। हम पहली बार महसूस करेंगे कि हम सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
उदाहरण: लॉकडाउन के शुरुआती दिनों को याद करें, जब सड़कों पर गाड़ियों का शोर बंद था और अचानक सब कुछ शांत हो गया था। उस 'विचित्र' शांति में लोगों ने प्रकृति और अपने परिवार के साथ एक नया जुड़ाव महसूस किया था।
Fishermen in the cold sea
would not harm whales
and the man gathering salt
would look at his hurt hands.
ठंडे समुद्र में मछुआरे
व्हेल मछलियों को नुकसान नहीं पहुँचाएंगे
और नमक इकट्ठा करने वाला व्यक्ति
अपने घायल हाथों को देख सकेगा।
व्याख्या: मौन रहने से हम अपनी विनाशकारी गतिविधियों को रोक देंगे। मछुआरे (जो यहाँ प्रकृति के शोषण का प्रतीक हैं) जीवों को मारना बंद कर देंगे। साथ ही, जो लोग अपनी आजीविका के लिए दिन-रात खट रहे हैं (जैसे नमक इकट्ठा करने वाले), उन्हें रुककर अपने स्वयं के कष्टों और स्वास्थ्य पर ध्यान देने का समय मिलेगा।
उदाहरण: एक कॉर्पोरेट कर्मचारी जो लगातार काम के दबाव में है, यदि वह एक दिन का 'मौन अवकाश' ले, तो उसे अहसास होगा कि काम की होड़ में उसने अपनी सेहत और सुकून को कितना नुकसान पहुँचाया है।
Those who prepare green wars,
wars with gas, wars with fire,
victory with no survivors,
would put on clean clothes
and walk about with their brothers
in the shade, doing nothing.
वे लोग जो विनाशकारी युद्धों की तैयारी करते हैं,
गैस वाले युद्ध, आग वाले युद्ध,
ऐसी जीत जहाँ कोई जीवित ही न बचे,
वे साफ कपड़े पहन लेंगे
और अपने भाइयों के साथ
छाया में टहलेंगे, कुछ भी न करते हुए।
व्याख्या: कवि उन लोगों पर प्रहार करता है जो पर्यावरण (green wars) और रसायनों से युद्ध लड़ते हैं। ऐसी जीत का क्या फायदा जहाँ जश्न मनाने के लिए कोई बचा ही न हो? मौन रहने पर ये युद्धखोर अपनी नफरत को त्याग कर 'साफ कपड़े' (नई विचारधारा) पहनेंगे और अपने शत्रुओं को भाई मानकर शांति से समय बिताएंगे।
उदाहरण: दो पड़ोसी देशों के सैनिक यदि हथियार छोड़ कर एक पल के लिए यह सोचें कि वे किसके लिए लड़ रहे हैं, तो उन्हें युद्ध की निरर्थकता समझ आएगी और वे शांति को गले लगा लेंगे।
What I want should not be confused
with total inactivity.
Life is what it is about;
I want no truck with death.
मैं जो चाहता हूँ उसे 'पूर्ण निष्क्रियता'
समझने की भूल नहीं होनी चाहिए।
जीवन का अर्थ कर्म और अस्तित्व है;
मेरा मृत्यु से कोई लेना-देना नहीं है।
व्याख्या: नेरुदा स्पष्ट करते हैं कि 'शांत रहने' का मतलब यह नहीं है कि हम आलसी हो जाएं या काम करना छोड़ दें। वह 'पूर्ण निष्क्रियता' यानी मृत्यु के पक्ष में नहीं हैं। वह चाहते हैं कि हम जीवित रहते हुए सचेत रहें और अपनी गतिविधियों के प्रभाव को समझें।
उदाहरण: जैसे एक मशीन को थोड़ी देर के लिए बंद किया जाता है ताकि वह ठंडी हो सके और बेहतर काम करे, वैसे ही मनुष्य को भी रुकना चाहिए, इसका मतलब यह नहीं कि वह मशीन खराब हो गई है या मर गई है।
If we were not so single-minded
about keeping our lives moving,
and for once could do nothing,
perhaps a huge silence
might interrupt this sadness
of never understanding ourselves
and of threatening ourselves with death.
यदि हम अपनी जिंदगी को चलते रखने के लिए
इतने एकाग्र (धुनी) न होते,
और एक बार के लिए कुछ न करते,
तो शायद एक गहरी खामोशी
इस दुख को बाधित कर सकती थी—
खुद को कभी न समझ पाने का दुख
और खुद को मौत से डराने का दुख।
व्याख्या: हम लोग मशीन की तरह केवल आगे बढ़ने और सफलता पाने के प्रति 'सिंगल-माइंडेड' हो गए हैं। इस दौड़ में हम खुद को ही भूल गए हैं। कवि के अनुसार, यह मौन उस उदासी को मिटा सकता है जो हमारे अंदर खुद को न समझ पाने के कारण पैदा हुई है।
उदाहरण: आजकल लोग डिप्रेशन का शिकार होते हैं क्योंकि वे लगातार भाग रहे हैं। यदि वे थोड़ा समय एकांत में खुद के साथ बिताएं, तो वे अपनी भावनाओं को बेहतर समझ पाएंगे और उनकी उदासी कम हो जाएगी।
Perhaps the Earth can teach us
as when everything seems dead
and later proves to be alive.
Now I’ll count up to twelve
and you keep quiet and I will go.
शायद पृथ्वी हमें सिखा सकती है
जैसे जब सब कुछ मृत प्रतीत होता है
और बाद में जीवित सिद्ध होता है।
अब मैं बारह तक गिनूँगा
और आप शांत रहें और मैं चला जाऊँगा।
व्याख्या: पृथ्वी पुनर्जन्म और धैर्य की सबसे बड़ी शिक्षक है। सर्दियों में सब कुछ जम जाता है और निर्जीव सा लगता है, लेकिन वसंत आते ही फिर से हरियाली छा जाती है। वैसे ही, मौन का यह पल हमें अंदर से नया जीवन देगा। इसके बाद कवि चुपचाप चला जाता है, जिम्मेदारी पाठक पर छोड़ते हुए।
उदाहरण: पतझड़ में पेड़ के सारे पत्ते गिर जाते हैं और वह ठूँठ जैसा लगता है, लेकिन वह मरा नहीं होता। वह अंदर ही अंदर ऊर्जा संचित कर रहा होता है ताकि नई कोपलें खिल सकें।
Theme (विषय/प्रसंग): इस कविता का विषय आत्मनिरीक्षण (Introspection), विश्व शांति और मानवता के बीच भाईचारे की आवश्यकता है।
Main Idea (मुख्य विचार/धारणा): कवि यह संदेश देना चाहता है कि दुनिया की समस्याओं का समाधान निरंतर भागदौड़ में नहीं, बल्कि कुछ पल रुककर शांति से अपने कर्मों पर विचार करने में निहित है।
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